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Showing posts from July, 2025

रामबिलास: एक अलग कहानी

रामबिलास: एक अलग कहानी धनेटा गाँव में रामबिलास नाम का एक आदमी रहता था, जिसकी उम्र लगभग 45 साल थी और वह बढ़ई का काम करता था। गाँव में सब उसे "रामबिलास भाई" कहते थे, लेकिन सच्चाई यह थी कि रामबिलास बहुत ही मतलबी, चालाक और केवल अपने फ़ायदे के बारे में सोचने वाला इंसान था। उसका एक ही उसूल था – "अपना काम बनता, भाड़ में जाए जनता" । --- विश्वास का फ़ायदा एक दिन, गाँव का ही एक लड़का, शंभू, रामबिलास से ₹5,000 उधार माँगने आया। शंभू ने अपनी बहन की शादी का हवाला दिया और अगले महीने पैसे लौटाने का वादा किया। रामबिलास ने देखा कि शंभू का परिवार संपन्न है और पैसे डूबने का कोई खतरा नहीं। उसने तुरंत शंभू को पैसे दे दिए, यह सोचकर कि इससे उसकी साख बनेगी और भविष्य में और बड़े फ़ायदे मिलेंगे। तीन महीने बीते, फिर छह महीने, शंभू ने पैसे नहीं लौटाए। जब रामबिलास ने पैसे मांगे, तो शंभू ने टालमटोल की। रामबिलास ने तुरंत गाँव के बड़े-बुजुर्गों को इकट्ठा किया और शंभू को सबके सामने बेइज्जत किया, जिससे शंभू को मजबूरन पैसे लौटाने पड़े और रामबिलास की "ईमानदारी" का ढोल पू...

Gadha bana dulha

गधा बना दूल्हा: एक अनोखी प्रेम कहानी! गधा बना दूल्हा: एक ऐसी शादी जो आपने कभी नहीं देखी होगी! एक ज़माने की बात है, एक छोटे से और शांतिपूर्ण गाँव में रामू नाम का एक सीधा-साधा किसान रहता था. रामू की ज़िंदगी बहुत ही सरल थी; वह अपनी ज़मीन पर मेहनत करता, फसल उगाता और अपनी छोटी सी झोपड़ी में संतोष से रहता था. उसके पास एक वफादार साथी था, जिसका नाम था धन्नू . धन्नू, रामू का इकलौता गधा था, जो उसके खेत के कामों में उसकी मदद करता था और बोझ ढोने के लिए भी इस्तेमाल होता था. धन्नू बड़ा ही शांत स्वभाव का था, लेकिन उसकी एक ख़ासियत थी – वह थोड़ा आलसी था. अक्सर काम करते-करते वह बीच में ही सुस्ताने लगता, जिससे रामू को कभी-कभी थोड़ी परेशानी होती, लेकिन रामू उसे बहुत प्यार करता था. एक दिन, रामू अपनी झोपड़ी में बैठा सोच रहा था. उसने देखा कि गाँव के सभी युवक-युवतियाँ शादी कर रहे हैं, बच्चे पैदा कर रहे हैं, और अपना घर बसा रहे हैं. तभी उसके मन में एक अजीब सा विचार आया. उसने सोचा, "जब इंसानों की शादी हो सकती है, तो मेरे प्यारे धन्नू की क्यों नहीं?" यह विचार उसके दिमाग में ऐ...

🍥 "मिस्टर गप्पू और गायब होती जलेबी" – भाग 1 और 2 | हास्य कथा

👉 आगे पढ़ें: मिस्टर गप्पू और गायब होती जलेबी – भाग 2 🔙 पहले पढ़ें: मिस्टर गप्पू और गायब होती जलेबी – भाग 1 भाग 1: जलेबी का रहस्य एक था शहर – मिठाईपुर , जो अपनी मिठाइयों के लिए मशहूर था। यहाँ सबसे मशहूर थे मिस्टर गप्पू , जिनकी दुकान " गप्पू की गरमा गरम जलेबी " पूरे शहर की शान थी। उनकी बनाई जलेबियों में मानो जादू था। एक बार जो चखता, वो उसका दीवाना हो जाता। मिस्टर गप्पू खुद भी जलेबी प्रेमी थे। हर रात दुकान बंद करने से पहले वो एक थाली जलेबियाँ अपने लिए रख लेते। लेकिन धीरे-धीरे वो जलेबियाँ गायब होने लगीं... पहले दिन कुछ जलेबियाँ कम थीं। दूसरे दिन आधी थाली गायब! तीसरे दिन तो पूरी की पूरी थाली ही! अब तो गप्पू जी का चेहरा जलेबी जैसा पीला पड़ गया। एक रात उन्होंने दुकान में छुपकर निगरानी की। आधी रात को एक परछाई दुकान में दाखिल हुई। वो थी उनकी बिल्ली – मिस म्याऊँ ! जो एक जलेबी को पंजे में दबाकर खा रही थी! गप्पू जी पहले चौंके, फिर मुस्कुराए। " तू ही निकली मेरी जलेबियों की चोरनी! " और उन्होंने उसे एक और जलेबी दे दी। लेकिन क्या वो अकेली थी? गप्पू ज...

Khamos taro ka sargam

खामोश तारों की सरगम रमेश बाबू एक शांत स्वभाव के व्यक्ति थे। उनकी दुनिया उनके काम और उनके बेटे, आदित्य, के इर्द-गिर्द घूमती थी। आदित्य बड़ा होकर एक मशहूर संगीतकार बना। उसके गाने लाखों दिलों को छूते थे, पर अपने पिता के साथ उसका रिश्ता हमेशा से कुछ खामोश सा रहा। दोनों एक-दूसरे से प्यार करते थे, ये उन्हें पता था, पर कभी खुलकर इज़हार नहीं कर पाते थे। शब्दों से ज़्यादा उनकी बातें चुप्पी में होती थीं। आदित्य जब भी घर आता, रमेश बाबू बस उसे देखते रहते। कभी उसके खाने की थाली में चुपचाप उसकी पसंदीदा मिठाई रख देते, तो कभी देर रात तक रियाज़ करते देख बस मुस्कुरा देते। आदित्य भी समझता था। जब उसे बुखार होता, तो पापा का हाथ उसके माथे पर सबसे पहले होता। जब वो उदास होता, तो पापा बिना कुछ कहे उसके लिए चाय बना लाते। एक दिन आदित्य को एक बड़े संगीत समारोह के लिए एक नया गीत बनाना था। वह हफ्तों से कोशिश कर रहा था, पर उसे उसे धुन नहीं मिल रही थी। वह तनाव में था। उसने अपने पिता को बताया कि वह एक ऐसी धुन चाहता है जो 'खामोश प्यार' को दर्शाए, उस प्यार को जो शब्दों से परे हो। रमेश बाबू ने बस उसे देखा...

Gmail की कुछ मुख्य विशेषताएं

Gmail की कुछ मुख्य विशेषताएं Gmail से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी Gmail Google द्वारा प्रदान की जाने वाली एक निःशुल्क ईमेल सेवा है। यह दुनिया की सबसे लोकप्रिय ईमेल सेवाओं में से एक है, जिसमें अरबों उपयोगकर्ता हैं। Gmail की कुछ मुख्य विशेषताएं: बड़ा स्टोरेज: Gmail 15 GB का निःशुल्क स्टोरेज प्रदान करता है, जिसे Google Drive और Google Photos के साथ साझा किया जाता है। शक्तिशाली खोज: Gmail में एक मजबूत खोज कार्यक्षमता है जो आपको अपने ईमेल को आसानी से खोजने में मदद करती है। स्पैम फ़िल्टरिंग: इसमें एक उन्नत स्पैम फ़िल्टर है जो अवांछित ईमेल को आपके इनबॉक्स में आने से रोकता है। एकीकरण: Gmail Google Calendar, Google Meet और Google Drive जैसी अन्य Google सेवाओं के साथ एकीकृत है। कस्टमाइज़ेशन: आप थीम, लेआउट और फ़िल्टर के साथ अपने Gmail अनुभव को कस्टमाइज़ कर सकते हैं। ब्लॉगर पोस्ट में Gmail का उल्लेख कैसे करें: यदि आप अपनी ब्लॉगर पोस्ट में Gmail से संबंधित कोई लिंक या जानकारी जोड़ना चाहते हैं, तो आप निम्नलिखित HTML कोड का उपयोग कर सकते हैं: <p>Gmail ...

फुआ के घर की चाह , फुआ के घर की चाह (जारी)

फुआ के घर की चाह नन्हीं आँखों में एक सपना, फुआ का आँगन था अपना। जिद थी मेरी, बात थी पक्की, ले चलो मुझे, अब नहीं रुक सकी। फुआ ने पकड़ाया एक सिक्का, दस रुपये का, चमचमाता टुकड़ा। बोलीं, "घर बहुत दूर है, बेटा, ये ले, पर मैं ले जा नहीं सकता।" बात अधूरी, मन था रूठा, गुस्से में वो सिक्का मैंने फेंका। ना देखा दायाँ, ना देखा बायाँ, फेंक दिया, न रहा उसका साया। सिक्का तो गया, मिला भी नहीं, पर फुआ का घर भी मिला नहीं। वो दस रुपये, थे नहीं कुछ खास, बड़ा था फुआ के घर जाने का आस। फुआ के घर की चाह (जारी) समय बदला, मैं बदल गया, पर उस गली का रास्ता आज भी मेरे लिए थम गया। बचपन की वो छोटी सी चोट, आज भी भीतर कहीं है एक खोट। क्या थी वो एक ज़िद नादान, या था वो रिश्तों का टूटा मान? सोचता हूँ अब, क्या था वो पल, जो भर गया आँखों में जल? क्या वो दस रुपये थे इतने कम, कि नहीं जा सका, थम गए मेरे कदम? शायद नहीं, वो रुपये की बात न थी, टूटी वो एक आस, जो सच्ची थी। एक बच्चे का विश्वास जब टूटा, तो फिर न उस डोर को कभी बूँटा। आज भी जब देखता हूँ वो गली, अजीब सी एक चुप्पी सी छ...

कविता: समय की चाल

🕰️ कविता: समय की चाल 🌃 रात बोली — “मैं चुपचाप आती हूँ, तारे संग मुस्काती हूँ, हर थके हुए मन को सुलाती हूँ। सपनों की दुनिया दिखाती हूँ, पर जो जागे, उन्हें रहस्य सिखाती हूँ।” 🌅 सुबह बोली — “मैं नयी उम्मीदें लाती हूँ, ओस की बूँदों-सी शीतल छाँव बन जाती हूँ। जो समय पर उठते हैं, मैं उनका साथ निभाती हूँ, अलार्म से पहले जो जागें, उन्हें खुशियाँ दे जाती हूँ।” 🌞 दिन बोला — “मैं मेहनत का नाम हूँ, रोशनी का काम हूँ, जो पसीना बहाए, मैं उसका ईनाम हूँ। सच्चाई से जो जीए, मैं उसकी पहचान हूँ, हर पल की कीमत बताता हूँ, मैं ही जीवन की जान हूँ।” 🌇 शाम बोली — “मैं सोच की घड़ी हूँ, दिनभर की कड़ी कड़ी हूँ। आराम का वक्त हूँ, रिश्तों की मिठास हूँ, मैं बताती हूँ — कल क्या ठीक, क्या बेमोल था, मैं सिखाती हूँ, हर अंत एक नई शुरुआत का रोल था।” ⏳ समय ने कहा — “मैं ही जादू हूँ, मैं ही सवाल हूँ, जिसने मुझे समझा, वही कमाल हूँ। ना मैं रुकता, ना मैं थमता, जो मेरे संग चला, वही जीवन को समझता।” ©️ Dhiraj Kumar द्वारा लिखित

✨ कहानी: झूठा सपना

*"A creepy abandoned haveli (mansion) at night, with broken windows and yellow light glowing from one window. A young Indian boy (Raju) stands nervously in front, looking back. A ghostly shadow of an old man appears near the door. Dark atmosphere, fog, horror-mystery vibe. Digital art, realistic style with dramatic lighting."* ✨ कहानी: झूठा सपना (रहस्य, रोमांच और सच्चाई की खोज) अर्जुन (हँसते हुए): "यार राजू, तू हर रात उसी हवेली के सपने देखता है? क्या बकवास है! सपना ही तो है, भूल जा!" राजू (गंभीर होकर): "अर्जुन, ये मज़ाक नहीं है। वो बूढ़ा आदमी हर बार एक ही बात दोहराता है — ‘तू मेरी गलती सुधारेगा’। उसकी आँखों में अजीब सी तड़प होती है… जैसे कोई अधूरी बात कहनी हो।" अर्जुन : "अगर तुझे इतना यकीन है, तो दादाजी से पूछ। वो शायद कुछ जानते हों।" राजू उसी शाम अपने दादा जी के पास पहुँचा। राजू: "दादाजी, गाँव के बाहर कोई ठाकुर हवेली थी क्या? जो अब नहीं है?" दादा (सन्न होकर): "तुम्हें उस हवेली के बारे में किसने बताया बेटा?...
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UP फ्री कोचिंग योजना 2025 | मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग रजिस्ट्रेशन शुरू | NEET, UPSC, JEE Preparation

📰 UP सरकार दे रही है फ्री कोचिंग 2025 में — UPSC, NEET, JEE, NDA के लिए सुनहरा मौका उत्तर प्रदेश सरकार ने छात्रों के लिए एक जबरदस्त तोहफा दिया है। अब आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली छात्र फ्री में कोचिंग पा सकते हैं — वो भी UPSC, NEET, JEE, NDA, CDS, TET जैसी बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं की! 🔷 योजना का नाम: मुख्यमंत्री अभ्युदय निशुल्क कोचिंग योजना 2025 🎯 उद्देश्य क्या है? इस योजना का मुख्य उद्देश्य उन छात्रों को सपोर्ट देना है जो कोचिंग की भारी फीस नहीं दे सकते, लेकिन मेहनत और लगन से किसी भी परीक्षा को पास करने का हौसला रखते हैं। 📚 किन परीक्षाओं की तैयारी कराई जाएगी? UPSC (IAS, PCS) NDA, CDS NEET (मेडिकल) IIT-JEE (इंजीनियरिंग) SSC, TET, बैंकिंग आदि 📅 आवेदन की प्रक्रिया: abhyuday.up.gov.in पर जाएं “Online Registration” पर क्लिक करें परीक्षा चुनें और फॉर्म भरें 📌 पहले से रजिस्ट्रेशन किया है? तो Login करें और क्लास शुरू करें। 📂 ज़रूरी दस्तावेज़: आधार कार्ड निवास प्रमाण पत्र पासपोर्ट साइज फोटो जन्मतिथि प्रमाण मोबाइल...

स्वच्छता – एक अच्छी आदत

🧼 स्वच्छता : एक श्रेष्ठ आदत जो जीवन को बदल सकती है स्वच्छता एक ऐसी आदत है जो केवल हमारे शरीर को ही नहीं, अपितु हमारे मन, विचार, घर, समाज और पर्यावरण को भी शुद्ध और सुंदर बनाती है। हमारे प्राचीन शास्त्रों में भी स्वच्छता को अत्यधिक महत्व दिया गया है। जब शरीर, मन और आसपास का वातावरण स्वच्छ रहता है, तब ही जीवन में सुख, स्वास्थ्य और सफलता आती है। स्वच्छता को दो भागों में बाँटा जा सकता है – बाहरी स्वच्छता और आंतरिक स्वच्छता । बाहरी स्वच्छता में शरीर, वस्त्र, घर, मार्ग, विद्यालय, कार्यस्थल आदि की सफाई आती है, जबकि आंतरिक स्वच्छता में हमारे विचार, भावनाएँ, मन और व्यवहार की शुद्धता आती है। 🪣 स्वच्छता के प्रमुख पहलू: व्यक्तिगत स्वच्छता: नित्य स्नान, स्वच्छ वस्त्र और हाथों की सफाई। घरेलू स्वच्छता: रसोई, शौचालय, आंगन आदि की नियमित सफाई। मानसिक स्वच्छता: सकारात्मक सोच और व्यवहार में शुद्धता। सामाजिक स्वच्छता: सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छता बनाए रखना। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने 'स्वच्छ भारत अभियान' की शुरुआत कर देशभर में स्वच्छता की चेतना जागृत की है। यह...

🌀 मायावी द्वीप – भाग 6:

🌀 मायावी द्वीप – भाग 6: “वियान का खोया अतीत”.    🎵 [Background: हल्की हवा, सूखी पत्तियों की सरसराहट, मंद ड्रम बीट] Narrator (वॉइसओवर): कालकारा की पहली हार के बाद, अग्नि वृत्त शांत हो गया। लेकिन अनवीरा की शक्ति जागने के बाद अब बारी थी वियान के जीवन के उस हिस्से की… जिसे वो खुद भी भूल चुका था। 🎬 सीन 1: अग्नि वृत्त के बाद (वियान और अनवीरा जंगल से बाहर एक शांत झील के किनारे बैठे हैं) अनवीरा: "वियान, अब जब मेरी यादें लौट आईं… तो लगता है तुम्हारे भीतर भी कुछ है… कोई अधूरी बात।" वियान: "कभी-कभी सपने आते हैं… जैसे मैं इस द्वीप का हिस्सा हूँ… कोई योद्धा… कोई रक्षक।" 🎵 [पानी की सतह पर हलचल होती है — और नीले प्रकाश से एक वृद्ध महिला प्रकट होती है] 🎬 सीन 2: झील की आत्मा आत्मा: "वियान… तुम्हारा समय आ गया है… सच्चाई जानने का।" वियान: "आप… कौन हैं?" आत्मा: "मैं हूँ जल-स्मृति… मैं वो हूँ जो हर आत्मा की पिछली यादें सुरक्षित रखती है। तुम्हें दिखाऊंगी… वो जीवन जिसे तुम भूल गए।" 🎵 [वियान के चारों ओर नीली लहरें घूमत...