Skip to main content

रामबिलास: एक अलग कहानी

रामबिलास: एक अलग कहानी

धनेटा गाँव में रामबिलास नाम का एक आदमी रहता था, जिसकी उम्र लगभग 45 साल थी और वह बढ़ई का काम करता था। गाँव में सब उसे "रामबिलास भाई" कहते थे, लेकिन सच्चाई यह थी कि रामबिलास बहुत ही मतलबी, चालाक और केवल अपने फ़ायदे के बारे में सोचने वाला इंसान था। उसका एक ही उसूल था – "अपना काम बनता, भाड़ में जाए जनता"

---

विश्वास का फ़ायदा

एक दिन, गाँव का ही एक लड़का, शंभू, रामबिलास से ₹5,000 उधार माँगने आया। शंभू ने अपनी बहन की शादी का हवाला दिया और अगले महीने पैसे लौटाने का वादा किया। रामबिलास ने देखा कि शंभू का परिवार संपन्न है और पैसे डूबने का कोई खतरा नहीं। उसने तुरंत शंभू को पैसे दे दिए, यह सोचकर कि इससे उसकी साख बनेगी और भविष्य में और बड़े फ़ायदे मिलेंगे।

तीन महीने बीते, फिर छह महीने, शंभू ने पैसे नहीं लौटाए। जब रामबिलास ने पैसे मांगे, तो शंभू ने टालमटोल की। रामबिलास ने तुरंत गाँव के बड़े-बुजुर्गों को इकट्ठा किया और शंभू को सबके सामने बेइज्जत किया, जिससे शंभू को मजबूरन पैसे लौटाने पड़े और रामबिलास की "ईमानदारी" का ढोल पूरे गाँव में बज गया।

---

चालाकी से हासिल योजना

रामबिलास को सरकार की तरफ से "प्रधानमंत्री आवास योजना" का पता चला। वह जानता था कि सीधे आवेदन करने से कुछ नहीं मिलेगा। वह पंचायत सचिव के पास गया और ₹5,000 घूस देने की पेशकश की, लेकिन एक शर्त पर – कि उसका नाम सबसे पहले लिस्ट में आए। पंचायत सचिव मान गया और रामबिलास का नाम लिस्ट में आ गया। गाँव के कई ज़रूरतमंद लोग रह गए, लेकिन रामबिलास को अपना नया पक्का मकान मिल गया, जिसे दिखाकर उसने गाँव में अपनी "पहुँच" का खूब प्रदर्शन किया।

---

चुनाव में तिकड़म

गाँव में एक पंचायत चुनाव हुआ। रामबिलास ने सोचा कि अब उसे पंचायत सदस्य बनना चाहिए, ताकि उसका दबदबा और बढ़े। उसने कुछ प्रभावशाली लोगों को पैसे और शराब का लालच दिया और उनसे अपने समर्थन में बोलने को कहा। चुनाव के आखिरी दिन, उसने चुपचाप प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों के वोटरों को भी पैसे खिलाए, ताकि उनके वोट बंट जाएं और रामबिलास आसानी से जीत जाए।

रामबिलास जीत गया और पंचायत में उसका राज चलने लगा। उसने अपने पद का इस्तेमाल निजी लाभ के लिए किया, गाँव के विकास फंड में हेराफेरी की और अपनी संपत्ति में खूब इज़ाफ़ा किया।

---

देर से मिली सज़ा

कुछ साल बाद, एक NGO गाँव में आई, जो भ्रष्टाचार के मामलों की जाँच कर रही थी। उन्होंने रामबिलास के खिलाफ़ कई शिकायतें सुनीं। गाँव वालों ने शुरू में डर के मारे कुछ नहीं बोला, लेकिन जब NGO ने कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया, तो कई लोगों ने रामबिलास के भ्रष्टाचार के सबूत दिए। जाँच हुई, रामबिलास दोषी पाया गया और उसे जेल भेज दिया गया। उसकी सारी अवैध संपत्ति जब्त कर ली गई।

---

सीख (Moral):

यह कहानी दिखाती है कि झूठ, लालच और चालाकी से भले ही इंसान थोड़ी देर के लिए सफल हो जाए, पर अंत में उसका पतन निश्चित है। गलत रास्तों पर चलने वाला कभी स्थायी सुख नहीं पा सकता। पैसा और ताकत से सब कुछ खरीदा जा सकता है, लेकिन सच्ची इज़्ज़त और मन की शांति नहीं। देर से ही सही, लेकिन कर्मों का फल हर किसी को मिलता है।

(अगर आपको यह कहानी पसंद आई, तो कृपया अपनी प्रतिक्रिया दें!)

Comments

Popular posts from this blog

🍥 "मिस्टर गप्पू और गायब होती जलेबी" – भाग 1 और 2 | हास्य कथा

👉 आगे पढ़ें: मिस्टर गप्पू और गायब होती जलेबी – भाग 2 🔙 पहले पढ़ें: मिस्टर गप्पू और गायब होती जलेबी – भाग 1 भाग 1: जलेबी का रहस्य एक था शहर – मिठाईपुर , जो अपनी मिठाइयों के लिए मशहूर था। यहाँ सबसे मशहूर थे मिस्टर गप्पू , जिनकी दुकान " गप्पू की गरमा गरम जलेबी " पूरे शहर की शान थी। उनकी बनाई जलेबियों में मानो जादू था। एक बार जो चखता, वो उसका दीवाना हो जाता। मिस्टर गप्पू खुद भी जलेबी प्रेमी थे। हर रात दुकान बंद करने से पहले वो एक थाली जलेबियाँ अपने लिए रख लेते। लेकिन धीरे-धीरे वो जलेबियाँ गायब होने लगीं... पहले दिन कुछ जलेबियाँ कम थीं। दूसरे दिन आधी थाली गायब! तीसरे दिन तो पूरी की पूरी थाली ही! अब तो गप्पू जी का चेहरा जलेबी जैसा पीला पड़ गया। एक रात उन्होंने दुकान में छुपकर निगरानी की। आधी रात को एक परछाई दुकान में दाखिल हुई। वो थी उनकी बिल्ली – मिस म्याऊँ ! जो एक जलेबी को पंजे में दबाकर खा रही थी! गप्पू जी पहले चौंके, फिर मुस्कुराए। " तू ही निकली मेरी जलेबियों की चोरनी! " और उन्होंने उसे एक और जलेबी दे दी। लेकिन क्या वो अकेली थी? गप्पू ज...

खोया हुआ सच – एक रहस्यमयी और डरावनी कहानी

खोया हुआ सच – एक रहस्यमयी और डरावनी कहानी  **लेखक:** [धीरज कुमार]   **श्रेणी:** थ्रिलर, रहस्य, हॉरर   ---  **परिचय**   क्या आपने कभी सोचा है कि एक छोटा-सा झूठ या गलत फैसला आपकी ज़िंदगी को कैसे बदल सकता है? आज की यह कहानी **"खोया हुआ सच"** एक ऐसे शख्स की है जिसकी ज़िंदगी एक पल में बदल जाती है। यह कहानी डर, रहस्य और सदमे से भरी हुई है। अगर आपको **थ्रिलर और सस्पेंस** पसंद है, तो यह कहानी आपको ज़रूर पसंद आएगी!   --- **खोया हुआ सच**   ### **रात का अँधेरा और एक गुनाहगार**   रात का अँधेरा गहरा हो रहा था। बारिश की बूंदों की आवाज़ के साथ हवा में एक अजीब-सी सन्नाटा छाया हुआ था। अभिषेक अपनी कार में बैठा, स्टीयरिंग को जोर से पकड़े हुए था। उसकी सांसें तेज थीं, आँखों में डर साफ झलक रहा था।   **"यह क्या हो गया..."** वह धीरे से बुदबुदाया।   उसके पीछे की सीट पर एक लाश पड़ी थी। खून की बूंदें कार की सीट पर फैल चुकी थीं। अभिषेक ने पीछे मुड़कर देखा और फौरन सिर हिला दिया।   **"नहीं... ये नहीं हो सकता। मैंने ऐस...

🔥✨ मायावी द्वीप – भाग 2

🔥✨ मायावी द्वीप – भाग 2: “पहेली और पहरेदार” 🎵 [Background: रहस्यमयी और धीमी म्यूजिक, पानी टपकने की आवाज़ें] Narrator (वॉइसओवर): गहराई में उतरते हुए वियान और अनवीरा अब एक नई दुनिया में थे। चारों ओर दीवारों पर नीली रोशनी चमक रही थी... और हवा में तैरती थी जादू की गंध... 🎬 सीन 1: जादुई गुफा का रहस्य अनवीरा: (धीरे-धीरे चलते हुए) "ये जगह तो किसी सपने जैसी लग रही है… हवा में कुछ चमक रहा है…" वियान: (दीवार छूते हुए) "देख! ये दीवार… गरम है। शायद ये जिंदा है?" 🎵 [दीवार पर अचानक कुछ लिखा हुआ उभरता है] अनवीरा: (पढ़ते हुए) "‘पहेली हल करो, वरना रास्ता सदा के लिए बंद हो जाएगा।’" 🎬 सीन 2: पहली जादुई पहेली वियान: (जोर से पढ़ता है) "‘जिसका चेहरा नहीं, फिर भी हर दिन नया रूप लेता है… बताओ, वो क्या है?’" अनवीरा: (सोच में) "चेहरा नहीं… लेकिन रोज़ बदलता है…" वियान: "शायद… समय? नहीं, नहीं…" अनवीरा: "रुको… मैं जानती हूँ — 'आइना' नहीं… शायद… 'दिन'? या… ‘कलेंडर’? " वियान: (उत्साह...