गधा बना दूल्हा: एक ऐसी शादी जो आपने कभी नहीं देखी होगी!
एक ज़माने की बात है, एक छोटे से और शांतिपूर्ण गाँव में रामू नाम का एक सीधा-साधा किसान रहता था. रामू की ज़िंदगी बहुत ही सरल थी; वह अपनी ज़मीन पर मेहनत करता, फसल उगाता और अपनी छोटी सी झोपड़ी में संतोष से रहता था. उसके पास एक वफादार साथी था, जिसका नाम था धन्नू. धन्नू, रामू का इकलौता गधा था, जो उसके खेत के कामों में उसकी मदद करता था और बोझ ढोने के लिए भी इस्तेमाल होता था. धन्नू बड़ा ही शांत स्वभाव का था, लेकिन उसकी एक ख़ासियत थी – वह थोड़ा आलसी था. अक्सर काम करते-करते वह बीच में ही सुस्ताने लगता, जिससे रामू को कभी-कभी थोड़ी परेशानी होती, लेकिन रामू उसे बहुत प्यार करता था.
एक दिन, रामू अपनी झोपड़ी में बैठा सोच रहा था. उसने देखा कि गाँव के सभी युवक-युवतियाँ शादी कर रहे हैं, बच्चे पैदा कर रहे हैं, और अपना घर बसा रहे हैं. तभी उसके मन में एक अजीब सा विचार आया. उसने सोचा, "जब इंसानों की शादी हो सकती है, तो मेरे प्यारे धन्नू की क्यों नहीं?" यह विचार उसके दिमाग में ऐसा बैठा कि उसने तुरंत फैसला कर लिया कि वह धन्नू की शादी करवाएगा.
अगले ही दिन, रामू ने पूरे गाँव में यह बात फैला दी. उसने गाँव के मुखिया से लेकर हर एक ग्रामीण को यह खुशखबरी सुनाई कि वह अपने गधे धन्नू के लिए दुल्हन ढूंढ रहा है. गाँव वालों ने जब यह सुना तो वे अपनी हँसी रोक नहीं पाए. चारों तरफ से रामू पर मज़ाक और टिप्पणियाँ आने लगीं. "रामू भाई, तुम्हें क्या हो गया है? गधे की भी भला कोई शादी करवाता है?" एक बूढ़े किसान ने हँसते हुए कहा. एक और ने मज़ाक उड़ाया, "लगता है रामू पर गर्मी चढ़ गई है, या शायद उसने भांग पी ली है!" लेकिन रामू अपनी धुन का पक्का था. उसे किसी की बातों से फर्क नहीं पड़ा. उसका मानना था कि हर जीव को साथी की ज़रूरत होती है, और उसका धन्नू भी इसका अपवाद नहीं है.
रामू ने कई गाँवों में धन्नू के लिए दुल्हन की तलाश शुरू कर दी. वह एक गाँव से दूसरे गाँव जाता, किसानों से मिलता और उनसे पूछता कि क्या उनके पास कोई अविवाहित गधी है. कई बार उसे निराशा हाथ लगी, कुछ लोग उस पर हँसते, तो कुछ उसे पागल समझते. लेकिन रामू ने हार नहीं मानी. उसकी यह अनोखी खोज कई हफ़्तों तक जारी रही.
आख़िरकार, उसकी मेहनत रंग लाई. एक दूरदराज़ के गाँव में, उसे एक और किसान मिला जिसका नाम था कालू. कालू भी रामू की तरह ही एक सीधा-साधा किसान था और उसके पास एक जवान गधी थी, जिसका नाम था बिजली. बिजली भी धन्नू की तरह ही शांत और स्वभाव से अच्छी थी. रामू ने जब कालू को अपनी इच्छा बताई, तो कालू पहले तो थोड़ा चौंक गया, लेकिन रामू के दृढ़ निश्चय और उसके गधे के प्रति प्रेम को देखकर वह सहमत हो गया. उसने सोचा कि यह एक अनोखा और मज़ेदार अनुभव होगा.
रामू और कालू ने मिलकर धन्नू और बिजली की शादी तय कर दी. शादी की खबर जंगल की आग की तरह पूरे इलाके में फैल गई. दूर-दूर से लोग इस अनोखी शादी को देखने के लिए उत्साहित हो उठे. गाँव में चर्चा का विषय सिर्फ यही शादी थी. बच्चों से लेकर बूढ़ों तक, हर कोई इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनना चाहता था.
शादी का दिन आ गया. पूरे गाँव में एक उत्सव का माहौल था. रामू ने धन्नू को खूब सजाया. उसे नहला-धुलाकर साफ़ किया गया, उस पर रंग-बिरंगी मालाएँ डाली गईं, और एक चमकीली लाल पगड़ी उसके सिर पर बाँधी गई. धन्नू को देखकर ऐसा लग रहा था मानो वह सच में कोई राजकुमार हो, जो अपनी दुल्हन से मिलने जा रहा हो. गाँव के कुछ शरारती बच्चे धन्नू को देख-देखकर तालियाँ बजा रहे थे और हँस रहे थे, लेकिन धन्नू अपनी ही मस्ती में था, शायद उसे भी अपनी शादी का अंदाज़ा हो गया था.
ढोल-नगाड़ों की थाप पर, बारात दुल्हन के घर की ओर रवाना हुई. रामू सबसे आगे चल रहा था, उसके पीछे धन्नू, और फिर गाँव के लोग नाचते-गाते, खुशियाँ मनाते हुए चल रहे थे. यह ऐसी बारात थी जो गाँव वालों ने पहले कभी नहीं देखी थी. बारात जब दुल्हन के गाँव पहुँची, तो वहाँ भी लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा था. सभी धन्नू को दूल्हे के रूप में देखकर आश्चर्यचकित और प्रसन्न थे. चारों तरफ तालियों और ठहाकों की गूँज थी.
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